1. सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय उद्यानों एवं वन्यजीव अभयारण्यों के एक किलोमीटर के दायरे में खनन निर्माण पर रोक लगा दी है।

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सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि प्रत्येक संरक्षित वन में 1 किलोमीटर का इको सेंसिटिव जोन (पारिस्थितकी संवेदनशील क्षेत्र) होना चाहिए। शीर्ष अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि प्रतिबंधित क्षेत्र के भीतर किसी भी स्थायी निर्माण की अनुमति नहीं दी जाएगी, साथ ही राष्ट्रीय वन्यजीव अभयारण्य या राष्ट्रीय उद्यान के भीतर खनन की भी अनुमति नहीं होगी।

यदि मौजूदा इको सेंसिटिव जोन 1 किमी के बफर जोन से आगे जाता है या यदि कोई कानूनी प्रपत्र अधिक सीमा को दर्शाता है, तो इस विस्तारित सीमा को ही मान्य किया जाएगा।

ये निर्देश जस्टिस एल नागेश्वर राव, बीआर गवई और अनिरुद्ध बोस की खंडपीठ ने पारित किए थे। कोर्ट ने प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश के प्रधान मुख्य वन संरक्षक को संबंधित इको सेंसिटिव जोन के भीतर मौजूदा संरचनाओं और अन्य प्रासंगिक विवरणों की एक सूची बनाने का निर्देश दिया।

 

   परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण बिंदु:

  • सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि प्रत्येक संरक्षित वन में 1 किलोमीटर का इको सेंसिटिव जोन (पारिस्थितकी संवेदनशील क्षेत्र) होना चाहिए। 
  • उच्च न्यायालय ने निर्देश दिया कि प्रतिबंधित क्षेत्र के अन्दर किसी भी स्थायी निर्माण की अनुमति नहीं दी जाएगी।
  • राष्ट्रीय वन्यजीव अभयारण्य या राष्ट्रीय उद्यान के भीतर खनन की भी अनुमति नहीं होगी।
  • यदि मौजूदा इको सेंसिटिव जोन 1 किमी के बफर जोन से आगे जाता है या यदि कोई कानूनी प्रपत्र अधिक सीमा को दर्शाता है, तो इस विस्तारित सीमा को ही मान्य किया जाएगा।

   जानने योग्य तथ्य:

  • राष्ट्रीय उद्यान में तीन परस्पर संबंधित क्षेत्र हैं, जिन्हें कोर एरिया, बफर ज़ोन और एक ट्रांजिशन एरिया या 'सहयोग क्षेत्र' के रूप में जाना जाता है।

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